02 December 2010

KBC के शुरूआती दिन...

Film City Mumbai का Floor No 7. जी हां, Filmcity Mumbai में बहुत ही खूबसूरत जगह है, जहां पर फिल्मों की Shooting होती है। ये जगह ऐसी है जहां चारों तरफ हरियाली और जंगल है… Borivali National Park से लगा होने के कारण, यहां पर कभी कभी रात को चीता और जंगली जानवर भी आ जाते हैं… इसी हरियाली के बीच में बड़े बड़े खाली Hall बने हैं, जिन्हें फिल्मी भाषा में Floor कहा जाता है। ये FCI के गोदाम की तरह होते हैं… लोग इन्हीं के अंदर, अपनी फिल्मों के, या TV Shows के Set लगा लेते हैं… और Film City के ऐसे ही एक Floor No 7 में KBC 2000 का Set लगाया गया था।

Set पूरी तरह बन कर तैयार हो चुका था… Set ऐसा कि देखते ही बनता था… कांच का कटोरा जैसा लगता था… पैरों तले कांच होने के कारण शुरू में बहुत दिक्कत आती थी… सबको लगता था, कि पैर रखते ही चटक जाएगा और हम नीचे कटोरे में गिर जाएंगे… ये Set भारत के बहुत ही मशहूर Art Director Nitin Desai ने लगाया था।

भारत में इस तरह की Lighting और High tech Show की शायद वो शुरूआत ही थी, ऐसा लगता था, जैसे कि Rocket launching Control room में हों… Control Room एक बड़ा कमरा होता है, जहां पर सारी Lights के Computer के और Sound के Control होते हैं, और Director भी यहीं बैठता है… हमारे Control Room में कमरे तो थे, लेकिन छत नहीं थी… क्योंकि हम वैसे भी Floor No 7 की छत के नीचे ही तो बैठे थे… लेकिन उसके बाद हमें छत की ज़रूरत पड़ गई… पहली बार हमें पता चला कि शांत से दिखने वाले Siddhartha Basu अचानक कुछ सही न होने पर इतनी ज़ोर से चिल्ला पड़ते थे, और वो आवाज़, Floor पर खेल खेल रहे Amitabh Bachchan को चौंका देती, वो डर के मारे खेल रोक देते… तभी लगा कि हमारे Control Room छत की बहुत ज़रूरत है, और रातों रात छत बनाई गई… तब जाके इस समस्या से छुटकारा मिला… लेकिन Sidhartha Basu की ख़ासबात ये भी थी, कि यदि एक Second में उनको गुस्सा आता था, तो आधे Second में उनका गुस्सा उतर भी जाता था… और वो ऐसे लगते कि, जैसे इन्होंने ऊंची आवाज़ में शायद बरसों से बात नहीं की है…

ख़ैर हम सब पहली बार एक बड़ा Show कर रहे थे, एक दूसरे से उतनी जान पहचान भी नहीं थी, धीरे धीरे एक दूसरे की आदतों, स्वभाव, योग्यता के बारे में धीरे धीरे पता चल रहा था… और इसी दौरान मुझे Amitabh Bachchan को समझने का मौका मिला…

Amit Ji, Rehearsals के लिए रोज़ आते, बड़ा मज़ेदार माहौल होता… हमने पहली बार देखा था, कि Amitabh Bachchan अपनी निज़ी ज़िदगी में कैसे हैं… हंसने हंसाने, मस्ती मज़ाक करने वाले Amitabh… उनके One liners का जवाब नहीं… इससे पहले हमने तो Amitabh को सिर्फ भूमिकाओं में देखा था, हम सब उनका ये रूप देखकर बहुत खुश् होते थे… जब भी उन्हें कोई कुछ ज्यादा करने को बोल देता तो वो कहते – हिटलर मर गए… लेकिन इन्हें छोड़ गए, हमारे लिए…। पहली बार हमें पता चला, कि Amit Ji लंबाई ज्यादा होने के कारण, 4 Plastic की कुर्सियों को एक के ऊपर एक रखकर बैठते हैं…। पहली बार पता लगा, कि Amit Ji Script सुनना नहीं, खुद पढ़ना पसंद करते हैं। उनकी लिखावट बहुत ही सुंदर और स्पष्ट है, और आज भी वो, अ अक्षर को पुराने Style में, यानि प के आगे तीन डंड़ियां लगा कर ही बनाते हैं… इसी दौरान Amit के साथ हुए एक वाकए ने मेरी ज़िदगी का नज़रिया बदल दिया…

[ Photo : एक बहुत ही Rare Photograph KBC 1 के Set पर Rehearsals के समय लिया गया, इसमें Amit Ji Team Member के साथ् Rehearsals करते हुए। Hood वाली Dress में Amit Ji बहुत Funny लग रहे हैं,। ]

दरअसल हुआ यूं, कि TV में अन्य कलाकारों में से जिसके लिए भी मैने लिखा, किसी ने Script पर इतना ध्यान नहीं दिया… इसलिए मेरी थोड़ी सी लापरवाही, या कहें तो आदत खराब हो गई… मैंने कभी `व' और `ब' में, ख और ख़ में फर्क़ ही नहीं किया… Movers and Shakers लिखता था, और वहां Shekhar Suman इन सब बातों पर ध्यान भी देते थे… लेकिन वो Shooting से पहले ख़ुद ही, ये Correction, Teleprompter पर कर लेते थे…

Bachchan जी जैसे ही Set पर घुसते, सबसे पहला सवाल करते कि Script लाओ… मैं इसके लिए तैयार नहीं रहता… फिर फटाफट Printout निकाले जाते… उसके बाद, Script लेकर पहुंचता तो हिंदी की Grammar के ठिकाने नहीं रहते… ऐसा नहीं कि ज्ञान नहीं था, लेकिन लापरवाही, कि कौन करे, भला बिल्ली को विल्ली लिख देंगे, फिर भी बोला तो बिल्ली ही जाएगा… Amit Ji ने, एक दो बार तो खुद ही अपनी तरफ से ये ग़लतियां ठीक कर दीं… लेकिन Teleprompter में वो सुधार उतने Seriously नहीं हो पाते थे… Bachchan Sir बोलते, तो मैं Sorry कहके बच जाता… मुझे मन ही मन ये लगता, कि ठीक है, हम यहां कोई Hindi का Exam देने थोड़े ही आए हैं, जहां Amitabh Bachchan हमारी ग़लतियां निकालें और सुधारते फिरें… वो Anchor हैं, Master Ji नहीं…। एक दिन फिर वही हुआ… फिर ग़लतियां… तो इस बार Bachchan Ji ने, थोड़े प्यार से, थोड़ी चिड़ के साथ, और थोड़े गुस्से से… मुझे लताड़ दिया… बोले मैं तीन चार दिन से देख रहा हूं वही ग़लतियां बार बार हो रही हैं, तुम्हें समझ नहीं आ रहा है, कि जैसा तुम लिखोगे, मैं वैसा वहां बोलूंगा, और यदि मैं सबके सामने ग़लत बोलता हूं, तो रात को ढंग से सो नहीं पाता… और अगर आज की ग़लती तुम आज नहीं सुधारोगे, तो वो आदत बन जाएगी, और जो एक बार आदत बन जाती हैं, वो बड़ी मुश्किल से छूटती है…

ये Lecture सुनकर मैं बाहर आ गया, मैं भी गुस्से में था… आख़िरकार ये तो हद दी… मैं भी Writer हूं, यहां डांट खाने नहीं आया… सोचा Show छोड़ दूंगा… दोस्तों के बीच खूब बड़बड़ाया… मुझे ऐसा लगा कि बाहर का आदमी… क्योंकि वो फिल्मों से आए थे, हमारे ऊपर धौंस जमा रहा था… लेकिन अचानक न जाने क्या हुआ… दिमाग में एक रोशनी सी कौंधी… Amit Ji की एक एक बात कानों में गूंजने लगी… उन्होंने अनजाने में, जीवन की एक बहुत बड़ी सीख दे दी थी… अगर मुझे जीवन में आगे बढ़ना है, तो इस सीख को तो सीखना ही पड़ेगा… बात सही थी, ग़लती को आदत क्यों बनने दिया जाए… उन्होंने मेरे लेखन पर ऊंगली नहीं उठाई थी, उन्होंने मेरी लापरवाही पर टोका था… और हो सकता था, कि उस लापरवाही की वजह से, मेरी अच्छी Lines का मज़ा भी ख़राब हो जाता हो…
मैंने जीवन में इस घटना को मार्गदर्शक बना लिया… और उसके बाद, तो ग़लतियां ऐसी सुधरी… कि आज Amit Ji से जुड़े हुए दस साल हो रहे हैं… और इन दस सालों में उन्होंने Television पर जो भी किया, उसका हिस्सा में रहा हूं…

आज एक घटना को काफी विस्तार से लिख दिया है, कल कुछ और दिलचस्प वाकये सुनाऊंगा… तब तक के लिए, शुभजीवन की शुभकामनाएं।

RD Tailang
Mumbai

29 November 2010

Amitabh से पहली मुलाकात...

Star Plus के Basement में बने Hall में हम सांसे थामे बैठे थे… कि अचानक, Amitabh Bachchan हवा के झौंके की तरह, Hall में दाखिल हुए… और सीधे आकर अपनी कुर्सी पर बैठ गए… Sports track suit उन्होंने पहना हुआ था, और सर पर Cap… देखने में Actor कम और खिलाड़ी ज्यादा लग रहे थे… आसपास के लोगों ने खुसुर फुसर करके हमें बताया कि बच्चन साब, सीधे Gym से यहां आते हैं… वो कौन बनेगा करोड़पति के लिए पूरी तैयारी कर रहे हैं…

Amitabh Bachchan ने कुर्सी पर बैठते ही एक नज़र पूरे Hall पर डाली… बाकी चेहरे तो उन्हें पहचाने लगे… सिर्फ मैं और मेरा दोस्त ही अजनबी थे… उन नज़र एक पल के लिए हम लोगों पर ठहरी… पर हम लोगों में ऐसी कोई बात नहीं थी, कि हमें एक पल से और ज्यादा समय के लिए देखा जाता… खैर ख़ेल की शुरूआत हुई, हमने देखा… कि Bachchan जी ने ठीकठाक ढंग से… उस दिन का खेल समाप्त किया… Music Cues कुछ आगे पीछे हुए… थोड़े से नियम पढ़े गए… जो कि सामने TelePrompTer पर चल रहे थे। इसकी अच्छी बात हमें ये लगी, कि इस Show में देवनागिरी का ही उपयोग किया जा रहा था, वर्ना TV और फिल्म जगत में, Roman अंग्रेजी में, हिंदी लिखी जाती है…

मेरे दोस्त Syed riyaz ने बचपन से एक अनोखी जिद पाल रखी थी… कि जीवन में कभी Amitabh Bachchan से मिलने का अवसर आया, तो मैं तभी मिलूंगा, जब कोई उनका बाकायदा परिचय कराए… और Amitabh इत्मिनान से उससे हाथ मिलाएं… ये बात उसने मुझसे पहले ही कही थी… और मैने कई बार इसे हंसी में उड़ा दिया था… कि Amitabh Bachchan के Autograph लेने में भी, भीड़ को चीरना पड़ता है, और ये जनाब… हाथ, वो भी इत्मिनान से मिलाने के सपने देख रहे थे…

ख़ैर हम चुपचाप बैठे रहे, ख़ेल खत्म हुआ… Siddhartha Basu बताने लगे, कि आज की Rehearsals में क्या ठीक रहा, किस Point पर ध्यान देना ज़रूरी है, वगैरह वगैरह… Amitabh ji एक Student की तरह, सब सुनते रहे… न जाने Siddhartha को क्या सूझी… उन्होंने Amitabh ji से कहा… Sir, एक Writer जो TV में काफी लिख रहा है, और मैंने इन्हें यहां बुलाया है, और इनसे भी लिखने को कहा है… ये सुनते ही, हम अपनी अपनी कुर्सियों से उठे और नमस्कार करते हुए… Amitabh Bachchan के सामने खड़े हो गए… Sidhartha ने पहले मेरा परिचय कराया.. Amitabh ने कहा… "नमस्कार मैं अमिताभ बच्चन…" एक महानायक के मुंह से खुद का परिचय सुनकर, बदन में सनसनी दौड़ गई… जिसके लिए, हम कितने Cinema Halls की Lines धक्के खाते रहे… उनकी नकल करने की कोशिश करते रहे, जिसे देख पाना ही अपने आप में ही शायद, बहुत बड़ी उपलब्धि थी, वही शख्स, मुझ से हाथ मिलाते हुए… अपना परिचय दे रहा था… फिर Syed Riyaz का परिचय हुआ… इस बार मुझे खुशी ज्यादा हुई… क्योंकि Syed ने जो सपना देखा था, वो सच हो गया था, Amitabh उनसे Hand Shake कर रहे थे…

Amitabh ji ने बड़े ध्यान से हमारा परिचय सुना… जिसमें कहा गया था, कि ये लोग इस समय बहुत ही Popular Show लिख रहे हैं… जिसका नाम है Movers and Shakers… सुनते ही Amitabh ji की आंखों में चमक आ गई… वो मेरी आंखों में आंखे डालते हुए बोले, अच्छा वही Show जो मेरे और मेरे परिवार के बारे में अक्सर मज़ाक बनाता रहता है… Amitabh ने अचानक गोली दागी थी, बचाव का कोई रास्ता नहीं था… सिवाय खिसियानी हंसी के… मैंने कहा नहीं Sir… इस Show में चार पांच Writers हैं… शायद उन्होंने लिखा होगा, लेकिन मैंने कभी नहीं लिखा… Comment मज़ाकिया लहजे में किया था, इसलिए बात भी मज़ाकिया लहज़े में ही निकल गई… और ये तय हुआ कि कल मैं कुछ लिखकर लाऊंगा, अगर पसंद आया तो, KBC Team में शामिल कर लिया जाऊंगा… मैंने मन में सोचा, कि अब Movers and Shakers वाली बात, आ ही गई है, इसलिए, मैं कुछ भी लिखूं, यहां अपनी दाल नहीं गलने वाली… ख़ैर Amitabh ji जिस तेज़ी से अंदर घुसे थे, उसी तेज़ी से, बाहर निकल गए…

जिस लेखक ने Amitabh की Rehearsals के लिए लिखा था, उनकी भाषा पर पकड़ बहुत अच्छी थी, लेकिन उनकी भाषा TV की भाषा नहीं थी, उसमें किताबी Lines ज्यादा थीं, वो सरकारी विज्ञप्ति की भाषा मालूम होती थी… बाद में पता चला कि वो लिखने वाले, दिल्ली के बहुत ही जाने माने पत्रकार हैं… इसलिए शायद TV की भाषा पर भले उनकी पकड़ न हो, लेकिन योग्यता में वो मुझसे कहीं ज्यादा सक्षम थे… जबकि में पिछले दो तीन सालों से TV लिख रहा था, इसलिए इस मामले में अनुभव मेरा ज्यादा था… और उसी अनुभव के आधार पर, मैंने चार पांच Sample Draft तैयार कर लिए, और उसी निर्धारित समय पर Rehearsals Hall पहुंच गया… एक दो लेखक और भी पहुंचे थे, अपनी अपनी Scripts के साथ। हम सब चुपचाप बैठ गए… उसी तरह से Amit जी आए… आज वो थोड़ा Late थे, उन्होंने आते ही माफी मांगी, कहा साकीनाका इलाके का Traffic बहुत ही बेकार हो जाता है, शाम के समय…

Rehearsal हुई… धड़कन थी, कि इतनी तेज़, जैसे दस मील दूर दौड़ कर आया हू… क्योंकि अब जो मैंने लिखा था, उसे हिंदी फिल्मों का महानायक या तो पढ़ने वाला था… या फिर मुझसे सुनने वाला था… Amitabh Bachchan के सामने अपनी Lines पढ़ना, वो भी पहली बार… पैर थे कि अभी से कांपने शुरू हो गए थे… Sidhartha ने मन में ही तय कर लिया था, कि आज सिर्फ 2 Writers की ही Script पढ़ने को देंगे… जिनमें एक मैं था… और उनमें मेरा पहला ही Number था… जैसे ही Rehearsals खत्म हुई… Sidhartha ने मुझे बुलाया और कहा Sir … RD कुछ लेकर आया है… (TV की दुनिया में मुझे लोग RD ही बुलाते हैं) मैंने पढ़ कर सुनाने के लिए पन्ना अपने सामने किया… लेकिन बच्चन जी ने इशारा किया कि वो खुद ही पढ़ेंगे… एक तरफ खुशी हुई कि अपनी लड़खड़ाती ज़बान में पढ़ने से बच गया… लेकिन दूसरी तरफ ये भी घबराहट होने लगी… कि अपनी LInes Amitabh Bachchan के मुंह से कैसी लगेगी… और Amit Ji ने अपनी आवाज़ में KBC के बारे में मेरे लिखे पहले विचार पढ़े…

" welcome, Good Evening & नमस्कार!! क्या आपने कभी सोचा है, कि अगर आप 20 हज़ार रूपये महीने के हिसाब से कमाएं, तो आपको एक करोड़ रूपये कमाने में कितना वक्त लगेगा? दस साल, बीस साल, या फिर तीस साल… जी नहीं, करीब करीब 50 साल यानि आधी शताब्दि… और अगर मैं ये वक्त, 50 साल से घटाकर 50 मिनिट कर दूं तो? आप सोच रहे होंगे कि ये कोई जादू है या चमत्कार..? जी नहीं, ये और कुछ भी नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा Show है – कौन बनेगा करोड़पति""

पढ़कर Amitabh जी ने, कोई बहुत ज्यादा खुशी तो ज़ाहिर नहीं की… बस उन्होंने यही कहा, कि अच्छा है…। लेकिन दूसरे लोगों ने मुझे बताया कि ये Lines एकदम सही बैठती थी, इनसे पता चलता था, कि एक आदमी के लिए एक करोड़ कितनी दूर है... और इस Show के ज़रिए, कितनी पास… इस तरह के विचार से एक आम आदमी का Show से जुड़ाव तुरंत हो जाता था… उन्ही लोगों ने मुझे ये भी बताया कि, Amit Ji ने, इतना कहा, यानि उन्हें पसंद आया था… क्योंकि अब तक कि बाकी Scripts पढ़कर, उन्होंने कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दी थी…

उसके बाद, पैसों की और Contract संबंधी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई… और जो चार पांच Writers को लेने की बात चल रही थी, मुझे पता चला… कि ये Show मैं ही लिखूंगा, क्योंकि Amit Ji मेरी Style से Comfortable हैं…

Set अब तक तैयार हो चुका था… उसे देखकर कार्यक्रम की विशालता का पता चला… अब मैं आपको बताऊंगा, कि set पर क्या क्या घटनाएं हुईं… और इस दौरान मुझे जिंदगी की कौन कौन सी सीखें जाने अनजाने में, Amitabh Bachchan मुझे सिखाते चले गए…

जल्द ही मिलूंगा, शायद कल ही…

RD Tailang

Mumbai

28 November 2010

"KBC 2000" की शुरूआत...


2000 में Television पर MTV और Channel [V] ही छाया हुआ था। Sony Tv पर Movers and Shakers कार्यक्रम सफलता पर था… वहीं फिल्मों की हालत बहुत खराब थी। दर्शकों ने Theaters की ओर जाना ही छोड़ दिया था… फिल्मों के बड़े बड़े सितारे, Zee Tv के Serials में दिखाई दे रहे थे… ऐसे में हिंदी फिल्मों के महानायक Amitabh Bachchan भी एक बहुत ही बुरे दौर से गुज़र रहे थे… ABCL की असफलता ने उन्हें आर्थिक रूप से झकझोर कर रख दिया था… तो दूसरी ओर अपनी आर्थिक परेशानियों को दूर करने की कोशिश में, उन्होंने Lal Badshah, Mratyudata Kohram Suryavansham जैसी फिल्में कीं, इससे उनकी महानायक वाली Image भी डगमगाने लगी थी… ऊपर से Income Tax और Bank Loan न चुका पाने के Notices की खबरें दर्शक चटख़ारे लेकर पढ़ रहे थे।

ये सारा माहौल Movers and Shakers जैसे Stand up comedy के Programme के लिए मानो बहुत ही मसालेदार चारा था... हंसी उड़ाने के लिए, लेखक को और क्या चाहिए… मैं उन दिनों यही Show लिख रहा था.. Shekhar Suman अपने चरम पर थे… हम जो लिखते थे, वो उसे और भी बेहतर बनाकर पर्दे पर ऐसे पेश करते थे, कि दर्शक सुनकर हंस पड़ता था, और जिस पर Punch बनाया जाता था, वो शायद तिलमिला कर रह जाता होगा… लेकिन हमने कभी मर्यादा पार नहीं की... हमने भले ही व्यक्ति के काम की, व्यक्ति की हंसी उड़ाई हो, लेकिन, उसके हालातों पर हम कभी नहीं हंसे... मगर हम एक बहुत ही सफल Show लिख रहे थे, और इस बात का हमें गुरूर था…

ऐसे में एक दिन दोपहर में खाना खाते समय… STAR TV पर एक AD आया… जिसमें बस दो कुर्सियां और उसमें एक कुर्सी पर Amitabh Bachchan बैठे थे ... और दूसरी कुर्सी खाली... अंधेरा सा Set और Amitabh दर्शकों की आंखों में आंखे डालकर कह रहे थे – "मैं यहां, आप वहां… हमारे बीच में 15 सवाल… और आप जीत सकते हैं… एक शून्य शून्य शून्य शून्य शून्य शून्य शून्य… यानि एक करोड़ रूपये… कौन बनेगा करोड़पति"... ये देखकर पूरा देश दंग रह गया… और खाना खाते खाते मैं भी…

पहली बार बड़े पर्दे का महानायक… छोटे पर्दे पर बैठा था… पहली बार एक करोड़ रूपये … का ईनाम सुना गया… वर्ना उन दिनों Quiz show में आमतौर पर पहला ईनाम 10 हज़ार रूपये का होता था… और Bumper ईनाम Maruti 800 Car होती थी… लेकिन यहां Amitabh Bachchan एक करोड़ रूपये देने की बात कर रहे थे… वो भी शुद्ध् हिंदी में… वर्ना MTV और Channel [V] की Hinglish में कौन शून्य जैसे शब्द का प्रयोग करता … ये सब देखकर अच्छा लगा… पहले ही Promo में बात जम गई…

न जाने क्यों लेखक के तौर पर, मन में ऐसा लगा कि ये मेरे पास लिखने को क्यों नहीं आया… आखिरकार मैं भी तो लेखक ही हूं और Television में एक सफल Show लिख रहा हूं… फिर मैंने अपने मन को समझा लिया… इतना बड़ा Show है, 1 करोड़ रूपये हैं, Amitabh Bachchan हैं, तो शायद बड़े बड़े लोग ही इसमें होंगे… शायद फिल्मों का कोई बड़ा लेखक ही इसको लिखेगा… मन खुद ही मचला, और खुद ही समझ गया...

शायद एक दो दिन निकल गए… Movers and Shakers की Meeting थी… रास्ते में अपने एक दोस्त Syed Riyaz से मिलना था, Andheri Station पर… उनका इंतज़ार कर ही रहा था, कि मेरे Mobile पर एक Phone आया… उन दिनों Incoming call के भी पैसे लगते थे, इसलिए हम लोगों की कोशिश होती थी, कि Phone पर तुरंत बात की जाए… या फिर Number देखकर, किसी PCO से एक रूपया का सिक्का डालकर Phone कर लिया जाए… लेकिन मेरी एक पुरानी दोस्त का Phone था… इसलिए मैंने उठा लिया… उसने कहा एक बहुत ही Urgent काम है… जल्दी से एक जगह पहुंचो वहां पर एक Company का Office है जिसका नाम है Synergy Communications.

Syed Riyaz मेरे दोस्त तब तक Station पर आ चुके थे, मैं उन्हे ही लेकर, बताए पते पर पहुंच गया… अपनी दोस्त से मिला… एक छोटे से Hall में दो तीन Plastic की कुर्सियां, और 4-5 computer पर बैठै कुछ अनजाने चेहरे… मन देखकर ही खट्टा हो गया… सोचा कि कोई नई Company है, जिसमें मेरी दोस्त काम कर रही है, और दोस्ती के नाम पर Free में या कम पैसों में कुछ Concept लिखवाना चाहती है… उसने उसी वक्त उस company के Director Siddhatrha Basu से मिलवाया… Sidhartha को हम दूरदर्शन के Quiz time से देखते चले आ रहे थे… मैं अच्छी तरह से उन्हें पहचानता था… Sidhartha ने मुस्कुराते हुए हमारा स्वागत किया – और हमसे पूछा, कि कौन बनेगा करोड़पति के बारे में जानते हो… मैंने कहा कि बिल्कुल, उसके तो Promo देखकर ही हम खुश हो गए… । वो बोले कि हम लोग वो बना रहे हैं… और हमें उस Show के लिए, young और Fresh Writers चाहिए…

उनका ये कहना था, कि हमें उनका खंडहर जैसा Office महल नज़र आने लगा, Plastic की कुर्सियां गुदगुदे सोफे नज़र आने लगे… Siddhartha ने पूछा, बताओ, एक से सौ तक की गिनती में, 5 कितनी बार आता है… हम चकरा गए… कुछ दिलचस्प बातों के बाद ये तय हुआ कि उन्हें लेखक की ज़रूरत है, लेकिन लिखेगा वही, जिसे Amitabh Bachchan Final करेंगे… वो बोले हम बहुत से Writers को Try कर रहे हैं… आप भी कुछ हमें लिख कर दो… हमने कहा ठीक है… उन्होंने Show का Format समझाया… फिर अचानक बोले, तुम लोग ऐसा क्यों नहीं करते… हर शाम को हम Amitabh Bachchan के साथ Star Plus के Basement में Practice करते हैं… तुम लोग वहीं आ जाओ… तो Show की Rehearsals भी देख लेना और Format भी समझ लेना…

मैं और मेरा दोस्त Riyaz शाम को ठीक समय से पहले Star Plus के Basement में पहुंच गए… हमें बताया गया… कि बच्चन साहब को पसंद नहीं है, कि इस वक्त बाहर का कोई आदमी वहां आए, इसलिए हमसे कहा गया कि अगर हमसे पूछा जाए, तो हम कह दें, कि हम तो Sample Player हैं, जो Practice के लिए बुलाए गए हैं…

Hall में एकदम शांति थी, सबको Amitabh Bachchan के आने का इंतज़ार था… वैसे ही जैसे जंगल में जब शेर आता है, तो उसके पहले आने की सनसनाहट जंगल के पेड़ों, पत्तों और जानवरों के बीच फैल जाती है… तब पहली बार एहसास हुआ कि Amitabh Bachchan की शख्सियत क्या है… वो आए नहीं थे, लेकिन धड़कने अभी से बढ़ गई थीं… तभी Siddhartha Basu को Phone पर सूचना मिली कि वो दरवाज़े पर आ गए हैं, वो उन्हें लेने Main Door तक गए… और हमारी सांसे जैसे अटक गई हों… Movers and Shakers में एक से एक बड़े बड़े Guest आए, लेकिन ऐसा अनुभव कभी नहीं हुआ… आखिर Amitabh Bahchan में ऐसा क्या है, कि धड़कनें उनके आने से पहले ही बढ़ रही थी…

जल्द ही, Amitabh से पहली मुलाकात… मिलते हैं… शायद कल ही…

R D Tailang

Mumbai


27 November 2010

"कौन बनेगा करोड़पति" - दस साल का सफर



कौन बनेगा करोड़पति की भारत में शुरूआत 3 July सन 2000 में Star Plus नाम के एक अनजाने से Channel पर हुई थी... अब इसे चमत्कार कहें, या कार्यक्रम की नवीनता... 7 दिनों के अंदर, इस Show ने Star Plus को सीधे NO 1 की Position पर बैठा दिया… और ऐसा बिठाया, कि दस साल हो गए Star PLus को वहां से हिलाने वाला, कोई भी नहीं आ पाया...

दस साल बाद, कौन बनेगा करोड़पति फिर आया है, 2010 में... और इस बार Sony TV पर आया, और ये Star Plus वाला अपना चमत्कार तो नहीं दोहरा पाया, लेकिन इसने मरते हुए Sony में जान फूंक दी...

मैं इस Show में लेखक के तौर पर पहले दिन, यानि सन 2000 से जुड़ा हूं… और हाल ही में इसके चौथे दौर की Shooting संपन्न हो गई है… मैं आपको कौन बनेगा करोड़पति के इन दस साल के सफर की दास्तान सुनाना चाहूंगा... कुछ खट्टी मीठी बातें… कुछ यादें… इस दौरान दो महानायकों के साथ काम करने का सौभाग्य मिला… श्री अमिताभ बच्चन, और श्री शाहरूख खान… दोनों के अनुभव, उनके काम करने की अलग अलग शैली…

ये कार्यक्रम हम सबके जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग रहा है… इस कार्यक्रम ने कईयों के जीवन को बदल दिया... कई लोग जो यहां से ईनाम जीत कर गए, उनका भाग्य परिवर्तन एक कार्यक्रम के ज़रिए हुआ है। इसकी नकल बनाने की कोशिश की गई … इसकी लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश की गई, लेकिन ये कार्यक्रम अपनी चाल से, अपने अंदाज़ में चलता ही गया... जब अन्य कार्यक्रमों में, गालियों और छिछोरेपन का खूब बोलबाला रहा, इसमें, कविताएं, छंद, प्रेरक प्रसंग जैसी चीज़ों का भरपूर उपयोग हुआ…

अब से लेकर, आने वाले कई दिनों तक जैसे जैसे मुझे समय मिलता जाएगा, मैं आपको कौन बनेगा करोड़पति के दस साल की यात्रा पर साथ ले जाऊंगा... शायद आपको पसंद आए… तो इंतज़ार कीजिए यहीं… मिलते हैं जल्द ही … शायद कल ही…
R D Tailang
Mumbai

06 September 2010

एक चूहे की मौत…

सबसे पहली बात तो ये व्यंग नहीं है…एक घटना या कहें दुर्घटना है…। आम तौर पर तो चूहा मरने के लिए ही होता है…हम सबने कितने चूहे मारे हैं… चूहा मार दवाईयां लाए हैं। चूहादानी में चूहें फंसा कर तालाबों में चूहों को जिंदा डुबोया है… सरकार तो चूहे मारने पर पैसे देती है…लेकिन फिर भी चूहे को मारने और किसी चूहे को मरते हुए देखने में बहुत अंतर है। जान जान होती है, चाहे एक इंसान सड़क पर तड़पता हुआ मिले, या एक चूहा… कुछ ऐसा ही हुआ एक सड़क पे…

वो अभी बहुत छोटा था, उसके शरीर में हल्का गुलाबीपन, उसके छोटे छोटे पैर, आंखों में चमक…जैसे बहुत कम समय में, बहुत सारी दुनिया देख लेना चाहता हो…कम से कम अभी उसके मरने की उम्र नहीं थी। मुझे नहीं मालूम कि चूहे सपने देखते हैं या नहीं, लेकिन जिस उम्र का वो था, उस उम्र में एक खुशहाल जिंदगी के सपने देखना कोई बहुत बड़ी ख्वाहिश नहीं थी। लेकिन मौत कभी उम्र नहीं देखती…

अगर वो किसी चूहेदानी में, या चूहामार दवाई खाकर मरा होता तो शायद उतना दुख नहीं होता, क्याकि हम अपने दिल को बहला लेते, कि इन चूहों के भाग्य में यही सब है, अच्छा हुआ उसे मुक्ति मिल गई… लेकिन जिस तरह की मौत उसे नसीब हुई थी, वो उस नन्ही जिंदगी के साथ नाइंसाफी थी।

उसने जिस घर में जन्म लिया था, शायद उस घर में Painting का काम चल रहा था, और वो नन्ही जान, खाने के लालच में या न जाने कैसे एक Paint के डब्बे में गिर गया… उसका पूरा शरीर मोटे Paint से ढका हुआ था, और उसके शरीर का आधा हिस्सा, अब भी उस Paint के ढेर में फंसा हुआ था, जो अब सूख चुका था, और सीमेंट की तरह पक्का हो गया था…न जाने कितने दिनों से वो फंसा हुआ होगा, भूख प्यास से बेहाल, और शरीर की शक्ति उस सूखे Paint से बाहर निकलने में जा रही थी…
इंसानियत के नाते, जिस परिवार में वो Paint के डब्बे में गिरा था, उस परिवार ने इतना किया कि उसे एक प्लास्टिक की थैली में डालकर, सड़क किनारे रख कर अपने कर्तव्य को पूरा समझ लिया…लेकिन यहां चूहे को अब दो चीज़ों से संघर्ष करना था…एक वो धीमी मौत जिसमें उसका आधा शरीर फंसा हुआ था…और बिना खाना और पानी के शरीर भी अब बचाव में साथ् नहीं दे रहा था…और दूसरी मौत वो जो सड़क पर उसे एक झटके में लीलने को तैयार थी…एक फंसा हुआ जिंदा चूहा…कुत्तों के सामने वैसा ही है, जैसे सड़क पर पड़ी हुई नाटों की नई गड्डी…भला कौन नहीं उठाना चाहेगा…

मैं ये भी नहीं जानता कि चूहों को रिश्तों नातों की समझ होती है, लेकिन उसके बाप को, मां को कैसा लग रहा है, अगर वो छिप के देख रहे होंगे, कि उनकी संतान को इतनी छोटी सी उम्र में, जिंदगी और मौत का सघंर्ष झेलना पड़ रहा है…

कुत्तों को इस बात की भनक लग गई थी, कि ये चूहा भाग नहीं सकता, बस अब इंतज़ार इस बात का था, कि उसे खाएगा कौन और कैसे खाएगा… कुत्तों ने अपने शिकार पर घेरा बनाना शुरू कर दिया था…और शायद उस नन्ही जान को भी ये एहसास हो गया था, कि मौत से उसे कोई नहीं बचा सकता…लेकिन फिर भी मरते हुए इंसान को भी जिंदगी से तो प्यार होता ही है…ये तो चूहा था…उसने अपने बेजान शरीर से आखिरी कोशिश करनी शुरू कर दी…कि शायद कोई चमत्कार हो जाए…कोई ऐसा फरिश्ता आ जाए, जो उसे बचा ले जाए…लेकिन फरिश्तों की नज़र में भी चूहा तो एक चूहा ही है…उसकी जान बचाने में कौन सा फरिश्ता अपना time waste करेगा…

तमाशबीनों के लिए चाहे चूहा मरे या इंसान, भीड़ में खड़े होना आदत होती है… मैं भी उन्ही तमाशबीनों में था, जो चूहे के सघर्ष को देख रहा था…तब पता चला कि चूहे को मारने और एक मरते हुए चूहे को देखने में कितना फर्क है…चूहा मर रहा था। मैं बस इतना ही कर सका कि एक लकड़ी से उस चूहे को, ऐसी जगह धकेल दिया, जिस जगह शायद कुत्ते उसे न ले जाएं, लेकिन ये बात मैं भी जानता था, और वो चूहा भी…कि ये मौत को कुछ देर धकेलने की ही कोशिश है…बल्कि मौत अगर सामने हो, फिर भी न आए, तो ऐसी जिंदगी मौत से भी बदतर होती है….पर यहां तो हम तमाशबीनों में, उस चूहे की मौत भी खड़ी थी, शायद ये देखने कि कोई कब तक उससे बच सकता है…

मुझे नहीं मालूम कि फिर उस चूहे का क्या हुआ, चूहा था तो मरा ही होगा…लेकिन मैंने मन में दुआ पढ़कर अपना फर्ज निभा लिया, कि अगले जन्म इसे चूहा मत बनाना, और अगर बना भी दिया, तो कम से कम इसे चूहे की मौत मत मारना…उस चूहे का संघर्ष आज भी मेरी आंखों में तैर रहा है…भगवान उसकी आत्मा को शांति दे…

© RD Tailang (Mumbai)

31 August 2010

हम सेवक, तुम स्वामी

वो चापलूसी कला के परमज्ञानी हैं। अगर चापलूसी PHD का विषय होता तो आज वो अपने नाम के आगे Doctor लिखते। वो चापलूसी के इतने महारथी हैं, कि जिसकी उनकी चापलूसी प्राप्त करने वाला व्यक्ति, अपने आपको या तो Superman समझने लगता है, या भगवान। चापलूसी में उन्हें कई सिद्धीया प्राप्त हैं। वो घटिया Joke पर ठहाके लगा सकते हैं… साधारण सी बात में उसके समर्थन में, On demand आंसू गिरा सकते हैं… और समय आने पर गधे को भी बाप बना सकते हैं…अगर भविष्य में चापलूसी का Nobel Prize उन्हें मिले तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

दरअसल चापलूसों का और हमारे समाज का Love and Hate relationship है। साहित्य चापलूसों को अगर नफ़रत और घृणा से देखता है, तो धर्म फिल्म और राजनीति में चापलूसों को बहुत ही सम्मानजनक Position मिली है। भगवान उस भक्त से कुछ ज्यादा ही Impress रहते हैं, जो अपने माल को भी 'सब कुछ मालिक का दिया हुआ है' कहता है। ये चापलूसी का ही एक प्रकार है। भगवान ने अपने भक्त को कभी Correct करने की नहीं सोची, कि 'नहीं बेटा ये तेरी मेहनत और बेईमानी की कमाई है।' क्योंकि कहीं न कहीं Free का Credit अच्छा लगता ही है। राजनीति में चापलूसों की कितनी इज्ज़त है, इस पर तो कई किताबें लिखी जा चुकी हैं, इसलिए यहां उस पर जगह waste करना बेकार है।

गांधी जी ने वैसे तो चापलूसी के Support में Direct कुछ भी नहीं कहा, लेकिन उनकी एक बात से चापलूसों को काफी बल मिलता है…कि बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, और बुरा मत कहो" चापलूस यही तर्क देते हैं, कि जब गांधी जी ने कहा है, बुरा मत कहो, तो हम क्यों कहें कि भाईसाब आप बहुत ही बुरे इंसान हैं… और बुरे इंसान को बुरा न कहना ही तो चापलूसी है।

कबीर दास जी भी बड़ी Impractical सी सलाह देकर चले गए… कि निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छबाए… अब भला कोई अपनी बुराई करने वाले पर, इतना Invest क्यों करना चाहेगा…कि उसे अपने ही आंगन में कुटिया दे के रख ले? और जब गांधी जी ने कहा है, कि बुरा मत सुनो, तो मैं अपनी बुराई क्यों सुनूं…?

फिल्मों में चापलूसों का उतना ही महत्व है, जितना कहानी का। कुछ फिल्में तो बिना कहानी, चापलूसी के दम पर बन गईं…। चापलूसों ने Hero को चढ़ा दिया, कि भाई जब आप हैं, तो कहानी की क्या ज़रूरत, आप खड़े हो जाएंगे तो फिल्म hit हो जाएगी... भाई जोश में खड़े हो गए…Film बैठ गई…!!

चापलूस Director को भी चढ़ा के रखते हैं, कि Sir आपकी Film का एक Scene दूसरे Directors की एक फिल्म के बराबर है…नतीज़ा बेचारा Director एक Scene लेकर बैठा रहता है, और दूसरे पूरी फिल्म बना कर चल देते हैं…।

दुखद बात ये है, कि चापलूसी की कला को वो स्थान नहीं मिल पाया, जो मिलना चाहिए था। कुछ भी हो, लेकिन चापलूसी भी काफी प्राचीन और सफल कला है, जिसका संरक्षण अब ज़रूरी है। कितने परिवार आज चापलूसी के दम पर ही चल रहे हैं। चापलूसों को भी उनको हक मिलना चाहिए, उन्हें सुविधाएं, भत्ते, सुरक्षा सभी मिलना चाहिए, जो आम लोगों को मिलता है। चापलूस दुनिया का सबसे परोपकारी व्यक्ति होता है, जो एक घटिया इंसान को भी कहता है, कि वो महान है। और जिसमें ये कहने का साहस हो, वो खुद कितना महान होगा…।
मैं चाहता हूं, कि आप लोग मेरी चापलूसी में, कुछ अच्छे अच्छे comments छोड़कर जाएं। धन्यवाद ।

© RD Tailang
Mumbai

25 August 2010

Twinkle Twinkle Super Stars



Article in Hindustan Times about KBC - 3 with SRK.
Working with SRK is always fun. I got opportunity to work with him in KBC-3, also I wrote Panchvi Paas and Screen awards 2010 where he hosted few segments with Shahid kapoor. He is also a great writer and a good rhymester. He wrote one poem for KBC when rani and Priety came on the show : for Rani he wrote :
Saaf dil ho jaise ganga ka paani...
Gussa bengal ke tiger sa...
chhoti si pyari Prem Kahani...
aankhon main hai acting bhari..
awaaz hai sexi jaani...
mummy hain fantastic inki..
papa is hero hindustani...
sirf yeh tamanna dil main hai...
jab yeh ban jayen 10 bachchon ki naani...
tab bhi mujhe yaad rakhen...
meri dost meri Rani...
filmon ki mahraani...

Ha ha ha its fun...

Writing for Mr. Bachchan is like diffrent experience... you are in trans... top of the world...feel blessed... etc etc..Also this comes as a huge responsibility on your shoulder...cant go wrong with him...each and everyday you learn lots of things from him...unknowingly...he is a great teacher...will put more pictures with him in my next post. This is one of the article.. which is right now easily avilable with me... will post.. lot more...